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रांची/डेस्क: एक खिलाड़ी अपनी मेहनत, लगन और प्रतिभा के दम पर न केवल अपने परिवार, बल्कि अपने देश और राज्य का नाम भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन करता है. वर्षों तक कठिन प्रशिक्षण, आर्थिक परेशानियों और अनेक चुनौतियों का सामना करने के बाद जब वह किसी बड़ी प्रतियोगिता में पदक जीतता है, तो उसे सम्मानित किया जाता है. पुरस्कार, सम्मान और कई तरह के आश्वासन दिए जाते हैं.
लेकिन, दुर्भाग्य की बात है कि कुछ ही सालों में ये खिलाड़ी गुमनाम हो जाते हैं. न तो केंद्र न ही राज्य सरकार इनकी कोई खोज-खबर लेती है. कई खिलाड़ी तो गंभीर आर्थिक परेशानियों से जूझते हैं. कुछ ऐसा ही मामला झारखंड की राजधानी रांची से सामने आया है. इंटरनेशनल स्तर पर तीन गोल्ड मेडल जीतने वाली पैरा एथलीट पुष्पा मिंज के सामने आज दो वक्त की रोटी के लाले पड़े हैं. मजबूरन उन्हें गुजारा करने के लिए रांची की सड़कों पर सब्जी बेचना पड़ रहा है.
इंटरनेशनल स्तर पर जीते तीन गोल्ड-एक ब्रॉन्ज मेडल
झारखंड की पैरा एथलीट पुष्पा मिंज ने नेशनल और इंटरनेशनल स्तर पर कई मेडल जीतकर झारखंड और देश का नाम रोशन किया है. इंटरनेशनल स्तर पर उसने तीन गोल्ड और एक ब्रॉन्ज मेडल जीता है. एशियन स्तर की प्रतियोगिता में भी उन्होंने एक ब्रॉन्ज मेडल जीता है. नेशनल स्तर पर भी उनके नाम कई गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल हैं. इन तमाम उपलब्धियों के बावजूद आज पुष्पा गुमनामी में जीवन गुजारने को मजबूर है.
एक दिन में 100 से 200 रुपये की कमाई
पुष्पा मिंज ने बताया कि उसने कोरोना काल में सब्जी बेचा शुरू किया था. इससे पहले वह कॉलेज जाती थी. पुष्पा के पास रहने के लिए अपना घर तक नहीं है. वह रांची में ही मामूली सुविधाओं के साथ एक किराये के मकान में रहती है, जिसका किराया करीब 2 हजार रुपये प्रतिमाह है.
पुष्पा ने बताया कि रोजाना वह सुबह 6:30 बजे से 10 बजे तक और फिर शाम 4 बजे से रात 8 बजे तक कडरू ब्रिज के नीचे सब्जी बेचती है. सब्जी बेचकर रोजाना वह 100 से 200 रुपये तक ही कमा पाती है. वहीं कभी-कभी बिक्री नहीं होने पर सब्जियां ख़राब भी हो जाती है, जिससे उसे आर्थिक नुकसान भी झेलनी पड़ती है.
हालांकि इस आर्थिक मज़बूरी के बीच भी पुष्पा ने खेलना नहीं छोड़ा है. वह अभी भी थ्रोबॉल की प्रैक्टिस करती हैं. पुष्पा का कहना है कि दूसरे खिलाड़ियों के लिए रहने और अभ्यास के लिए बेहतर सुविधाएं हैं, लेकिन उनके पास अपना ग्राउंड या हॉस्टल जैसी कोई सुविधा नहीं है.
सीएम हेमंत ने दिया था आश्वासन
पुष्पा ने बताया कि इंटरनेशनल प्रतियोगिता में जीतने के बाद उसने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से भी मुलाकात की थी. सीएम ने उन्हें सम्मानित किया था और प्रतियोगिता में खर्च हुई राशि वापस देने की भी बात कही थी, लेकिन आज तक उन्हें वह राशि नहीं मिली.
नौकरी मांग रही पुष्पा
पुष्पा ने सरकार से सिर्फ एक नौकरी की मांग की है. पुष्पा का कहना है कि अगर उन्हें नौकरी मिल जाएगी, तो उसे सब्जी बेचने की मज़बूरी से राहत मिलेगी, साथ ही वह अपने खेल पर भी बेहतर तरीके से ध्यान दे सकेंगी, जिससे भविष्य में भी वह देश और राज्य के लिए पदक जीत सके.
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