प्रमोद शर्मा, हापुड़: गढ़ रोड स्थित ततारपुर चौराहे के आसपास कथित अवैध खनन को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में डंपरों की आवाजाही के बीच कथित रूप से खनन गतिविधियां चल रही हैं। हैरानी की बात यह है कि जिस स्थान के आसपास यह गतिविधियां होने की बात कही जा रही है, वहां से पुलिस चौकी भी महज चंद कदमों की दूरी पर बताई जा रही है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि वास्तव में खनन हो रहा है तो जिम्मेदार विभागों की नजर इस पर क्यों नहीं पड़ रही?
स्थानीय लोगों के मुताबिक ततारपुर चौराहे के आसपास कई बार डंपरों की आवाजाही देखी गई है। लोगों का दावा है कि क्षेत्र में मिट्टी उठाने और ले जाने का सिलसिला कथित रूप से जारी है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। इसके बावजूद मामले ने खनन विभाग की निगरानी व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
लोगों का कहना है कि खनन से जुड़े वाहनों की आवाजाही यदि लगातार हो रही है तो संबंधित विभाग को मौके पर पहुंचकर यह स्पष्ट करना चाहिए कि वहां खनन की कोई वैध अनुमति है या नहीं। साथ ही वाहनों के कागजात, खनन पट्टा, रॉयल्टी और परिवहन से संबंधित दस्तावेजों की भी जांच की जानी चाहिए।
सबसे अहम सवाल खनन विभाग की सक्रियता को लेकर है। यदि विभाग को गतिविधियों की जानकारी है तो अब तक जांच या कार्रवाई क्यों नहीं हुई? और यदि जानकारी नहीं है तो क्षेत्र में निगरानी व्यवस्था किस स्तर पर की जा रही है? चौकी के नजदीक कथित गतिविधियां होने के आरोपों ने पुलिस और खनन विभाग दोनों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय लोगों ने जिलाधिकारी और संबंधित खनन अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति की जांच की जाए और यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई हो। अब देखना यह है कि शिकायत और आरोपों के बीच जिम्मेदार विभाग मौके पर पहुंचकर हकीकत सामने लाते हैं या मामला कागजी जांच तक ही सीमित रह जाता है।