प्रमोद शर्मा, हापुड़/पिलखुवा: प्लेट में छोले-कुलचे, साथ में केले का सलाद और स्वाद के चटकारे! लेकिन अगर सलाद में इस्तेमाल होने वाले केले नाले से निकाले गए कूड़े के पास रखे हों और उन पर मक्खियां भिनभिना रही हों, तो स्वाद के साथ सेहत का सवाल भी खड़ा होना लाजिमी है। पिलखुवा में एक चर्चित रेहड़ी पर खाद्य पदार्थों के रखरखाव को लेकर सामने आए आरोपों ने साफ-सफाई और खाद्य सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बताया जा रहा है कि इस रेहड़ी पर किसी रेस्टोरेंट की तरह ग्राहकों की भीड़ लगी रहती है। यहां छोले-कुलचे की एक प्लेट 60 रुपये में बेची जाती है। बड़ी संख्या में लोग स्वाद के चक्कर में यहां पहुंचते हैं, लेकिन आरोप है कि प्लेट के साथ दिए जाने वाले केले के सलाद की ट्रे नाले से बाहर निकाले गए कूड़े के पास रखी जाती है। आसपास मक्खियों का जमावड़ा होने की बात भी सामने आई है। यदि मौके पर यह स्थिति पाई जाती है, तो यह खाद्य पदार्थों की स्वच्छता और सुरक्षित रखरखाव को लेकर गंभीर चिंता का विषय है।
स्वाद के आगे स्वच्छता की अनदेखी?
खाद्य पदार्थों को खुले में रखना, गंदगी के संपर्क में आने देना और मक्खियों से बचाव के पर्याप्त इंतजाम नहीं करना लोगों की सेहत के लिए जोखिम पैदा कर सकता है। खासकर सलाद जैसे खाद्य पदार्थ, जिन्हें अक्सर बिना पकाए खाया जाता है, उनके रखरखाव में अतिरिक्त सावधानी जरूरी है। ऐसे में खाद्य सुरक्षा विभाग की जिम्मेदारी बनती है कि शिकायत मिलने पर मौके का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति की जांच करे।
समोसे की गुणवत्ता पर भी उठे सवाल
पिलखुवा में समोसे बेचने वाले कुछ दुकानदारों के यहां इस्तेमाल होने वाले तेल और सामग्री की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि घटिया गुणवत्ता की सामग्री इस्तेमाल किए जाने के बावजूद ग्राहकों से ऊंचे दाम वसूले जाते हैं। हालांकि, तेल या सामग्री की गुणवत्ता की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है।
आखिर कब जागेगा खाद्य सुरक्षा विभाग?
स्थानीय स्तर पर मांग उठ रही है कि खाद्य सुरक्षा विभाग संबंधित रेहड़ियों और दुकानों का निरीक्षण करे, खाद्य पदार्थों के रखरखाव की जांच करे और नियमों का उल्लंघन मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई करे। सवाल यह है कि लोगों को स्वाद परोसने वाले प्रतिष्ठानों और रेहड़ियों पर स्वच्छता के मानकों का पालन सुनिश्चित करने के लिए नियमित निगरानी कब होगी?