Dhanteras 2026: धनतेरस का त्योहार आते ही घरों में दीपावली की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। बाजारों में खरीदारी की रौनक रहती है और घरों में मां लक्ष्मी तथा भगवान कुबेर की पूजा की तैयारी की जाती है। लेकिन धनतेरस पर एक ऐसी परंपरा भी निभाई जाती है, जिसका संबंध परिवार की लंबी आयु और सुरक्षा की कामना से है। यह परंपरा है यम दीपदान की।
हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, धनतेरस की शाम घर के बाहर यमराज के नाम से दीपक जलाया जाता है। इसे यम दीपक कहा जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से परिवार के सदस्यों को अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति मिलती है और घर में सुख-शांति बनी रहती है।
कब है धनतेरस 2026?
इस साल धनतेरस का पर्व 6 नवंबर, शुक्रवार को मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार, त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर को सुबह 10 बजकर 30 मिनट से शुरू होगी और 7 नवंबर को सुबह 10 बजकर 47 मिनट तक रहेगी। यम दीपदान शाम के समय प्रदोष काल में किया जाता है।
यम दीपक जलाने का शुभ मुहूर्त
धनतेरस पर यम दीपक सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में जलाना शुभ माना जाता है।
- तारीख: 6 नवंबर 2026, शुक्रवार
- भोपाल में सूर्यास्त: शाम 5:39 बजे
- प्रदोष काल: शाम 5:39 से रात 8:13 बजे तक
- यम दीपदान: सूर्यास्त के बाद शाम के समय
भोपाल के स्थानीय पंचांग के अनुसार ये समय दिए गए हैं। दूसरे शहरों में सूर्यास्त और मुहूर्त में अंतर हो सकता है।
यम दीपक जलाने के लिए जरूरी सामग्री
यम दीपदान के लिए बहुत अधिक सामग्री की आवश्यकता नहीं होती। इसके लिए आप इन चीजों की व्यवस्था कर सकते हैं।
- मिट्टी का नया चौमुखा दीपक
- सरसों का तेल या तिल का तेल
- रुई की चार बत्तियां
- रोली और हल्दी
- अक्षत यानी साबुत चावल
- एक सिक्का
- फूल और जल
कैसे जलाएं यम दीपक? जानें पूरी विधि
1. चौमुखा दीपक तैयार करें: सबसे पहले मिट्टी का साफ और नया चौमुखा दीपक लें। इसमें सरसों या तिल का तेल डालें और चारों दिशाओं में रुई की बत्तियां लगाएं।
2. रोली और अक्षत चढ़ाएं: दीपक को एक थाली में रखकर उस पर रोली, हल्दी और अक्षत अर्पित करें। कुछ परंपराओं में दीपक में एक सिक्का रखने की भी मान्यता है।
3. दक्षिण दिशा में रखें दीपक: यमराज को दक्षिण दिशा का अधिपति माना जाता है। इसलिए यम दीपक को घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके रखने की परंपरा है।
4. परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करें: दीपक जलाते समय यमराज का स्मरण करें और परिवार के सभी सदस्यों की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुरक्षा की कामना करें।
5. जल से करें दीपदान: कुछ परंपराओं में दीपक के आसपास थोड़ा जल अर्पित करने का भी विधान है। पूजा के बाद श्रद्धापूर्वक प्रणाम करें।
क्षेत्र और परिवार की परंपराओं के अनुसार पूजा की विधि में थोड़ा अंतर हो सकता है।
यम दीपक जलाते समय इन बातों का रखें ध्यान
- यम दीपदान के लिए नया और साबुत मिट्टी का दीपक इस्तेमाल करें।
- दीपक घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर रखें।
- दीपक जलाते समय मन में श्रद्धा और परिवार की मंगलकामना रखें।
- दीपक ऐसी सुरक्षित जगह रखें, जहां हवा से वह बुझ न जाए और आग लगने का खतरा न हो।
- कुछ पारिवारिक परंपराओं में दीपक रखने के बाद पीछे मुड़कर नहीं देखने की मान्यता भी है।
क्यों जलाया जाता है यम दीपक?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यमराज मृत्यु के देवता और सूर्यदेव के पुत्र हैं। धनतेरस पर उनके नाम से दीपदान करने की परंपरा परिवार के सदस्यों की दीर्घायु और अकाल मृत्यु से रक्षा की कामना से जुड़ी है। मान्यता है कि यम दीपदान से यमराज प्रसन्न होते हैं और परिवार पर अपनी कृपा बनाए रखते हैं। यह दीपक जीवन की सुरक्षा, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-शांति की प्रार्थना का प्रतीक माना जाता है। ये धार्मिक आस्थाएं और पारंपरिक मान्यताएं हैं, इन्हें किसी निश्चित परिणाम की गारंटी नहीं माना जाना चाहिए।