छात्र आन्दोलन

14वीं JPSC समेत बैकलॉग 25 परीक्षाएं हुई रद्द, जिनकी नियुक्ति हो चुकी है, नौकरी कर रहे हैं, क्या होगा उनका?

4 राज्यों में भी इससे पहले आ चुकी है ऐसे स्थिति, जानें वहां क्या हुआ

By Pramod Kumar,News11 Bharat,
14वीं JPSC समेत बैकलॉग 25 परीक्षाएं हुई रद्द, जिनकी नियुक्ति हो चुकी है, नौकरी कर रहे हैं, क्या होगा उनका?

प्रमोद जायसवाल/न्यूज11  भारत

रांची/डेस्क: सोमवार को झारखंड की हेमंत सरकार ने 14वीं JPSC समेत बैकलॉग 25 परीक्षाएं रद्द करने का ऐलान कर दिया. हालांकि इसके बाद भी छात्रों का अपनी अन्य मांगों को लेकर आन्दोलन जारी है. इस पर क्या होगा, यह तो आने वाला वक्त बताएगा, लेकिन अभी एक बहुत बड़ा सवाल है कि जो परीक्षाएं रद्द हुई हैं और जिन अभ्यर्थियों की नियुक्ति हो चुकी है और वे अधिकारी बन कर नौकरी कर रहे हैं, उनका क्या होगा.

संविधान क्या कहता है?

सबसे पहले इस सवाल को कानूनी और संवैधानिक नजरिए से समझने की जरूरत है. संविधान में जो प्रावधान है उनके अनुसार-

  • अनुच्छेद 320 + 315 के अनुसार सभी PSC (Public Service Commission) का काम "पारदर्शी तरीके से चयन करना" है. अगर परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी साबित होती है तो सरकार/कोर्ट उस परीक्षा को रद्द कर सकता है.
  • अनुच्छेद 14 + 16 समानता और रोजगार का अधिकार देता है.  इसके अनुसार, अगर एक बार पेपर लीक हो गया तो पूरी प्रक्रिया को "दूषित" माना जाएगा.  इस अनुच्छेद के अनुसार, "निष्पक्ष परीक्षा" का अधिकार सभी अभ्यर्थियों का है.
  • परीक्षाओं में धोखे की पूरी प्रक्रिया को अवैध करार दिया जाएगा. इसे रद्द करना संवैधानिक है.

नियुक्ति के बाद नौकरी कर रहे लोगों का क्या होगा?

यह भी एक जटिल प्रश्न है कि जिन भी परिस्थियों में परीक्षा के बाद अभ्यर्थी का चयन हो गया है, उसकी नियुक्ति हो गई है और वह नौकरी कर रहा है, ऐसे में परीक्षा रद्द होने का उस पर क्या असर पड़ेगा.

  1. संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार, अगर ज्वाइनिंग नहीं हुई है तो नियुक्ति रुक जाएगी. नई परीक्षा होगी और फिर से मेरिट बनेगी
  2. जॉइन करके नौकरी कर रहे हैं और अभ्यर्थी सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हैं, अगर अभ्यर्थी की गलती नहीं है तो तुरंत बर्खास्तगी नहीं होगी. जांच होगी. जांच में प्रॉक्सी/पैसा देकर नियुक्ति साबित हो जाती है तो बर्खास्तगी तय.
  3. 2-3 साल से नौकरी कर रहे लोगों के मामले में कोर्ट "Doctrine of Legitimate Expectation" देखेगा. ज्यादातर केस में सेवा बच जाती है, पर प्रमोशन रुक सकता है. वेतन रिकवरी नहीं होगी.
  4. JPSC के केस में सरकार ने अभी घोषणा की है. नियुक्त अधिकारियों की गठित कमिटी जांच" करेगी. दोषी पाए जाने पर ही कार्रवाई होगी.

दूसरे राज्यों के उदाहरण

जो स्थिति झारखंड में अभी सामने आई है, इससे पहले ऐसे केस दूसरे राज्यों में भी आ चुके हैं, इसलिए वहां क्या-क्या हुआ, वह भी जानना महत्वपूर्ण है.

राजस्थान
राजस्थान में RAS 2013 में पेपर लीक का मामला सामने आया था. इसकेबाद पूरी परीक्षा रद्द कर दी गयी. ऐसा परीक्षा के दो साल बाद हुई. नई परीक्षा हुई. जिनकी नियुक्ति हो गई थी उन्हें सेवा में रखा गया, पर जांच चली.

उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश की UPPSC 2011 में भी पेपर लीक + धांधली का मामला सामने आया था. हाईकोर्ट ने परीक्षा को रद्द किया था. इसके बाद नई परीक्षा हुई. जॉब कर रहे PCS अफसरों की जांच हुई, कुछ अफसरों को बर्खास्त भी किया गया.

मध्य प्रदेश
मध्य प्रदेश की MPPSC 2013 के चर्चित Vyapam घोटाला बहुत बड़े कांड के रूप में सामने आया था. 3000 से ज्यादा नियुक्तियां रद्द की गई थीं. CBI जांच के बाद कई अफसर बर्खास्त हुए. यहां तक की जेल भी गए.

बिहार
बिहार का उदाहरण सबसे ताजा है. BPSC 2024 परीक्षा भी पेपर लीक की भेंट चढ़ी थी. इसके बाद BPSC ने इस परीक्षा को रद्द करके दोबारा परीक्षा कराई थी. पहले से सेलेक्ट हुए लोगों को नहीं हटाया.

झारखंड में क्या-क्या हो सकता है?

जैसा की झारखंड सरकार ने सोमवार को छात्र आन्दोलन के बाद कुछ घोषणाएं की है. उनके अनुसार 14वींJPSC + बैकलॉग 25 परीक्षाएं रद्द कर दी गई है. TDPL ने जितनी परीक्षाएं ली हैं, उनको रद्द कर दिया गया है. TDPL की सरकार जांच कराएगी. ED + CID + नई कमिटी इसकी जांच करेगी. IIT/ISM/XLRI से सलाह लेकर नई एजेंसी से परीक्षा कंडक्ट कराई जाएगी. 90 दिनों में CID रिपोर्ट देगी.

सरकार की घोषणाओं की मुख्य बातें

संविधान सरकार को "गड़बड़ी वाली परीक्षा रद्द" करने का अधिकार देता है. 
नौकरी कर रहे लोगों ने अगर खुद धांधली नहीं की तो सेवा आमतौर पर बची रह सकती है. पर जांच सबकी होगी.

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