जनजातीय उत्सव

डीपीएस इंटर कॉलेज चाईबासा में पहली बार भव्य जनजातीय उत्सव एवं पारंपरिक परिधान प्रतियोगिता का आयोजन

पारंपरिक वेशभूषा, लोक-संस्कृति और जनजातीय विरासत की रंगीन छटा से सजा जे.पी. ऑडिटोरियम

By : Pramod Kumar , News11 Bharat
डीपीएस इंटर कॉलेज चाईबासा में पहली बार भव्य जनजातीय उत्सव एवं पारंपरिक परिधान प्रतियोगिता का आयोजन

रोहन निषाद/न्यूज़ 11 भारत

चाईबासा/डेस्क:चाईबासा  डी.पी.एस. पब्लिक स्कूल एंड इंटर कॉलेज, चाईबासा के जे.पी. ऑडिटोरियम में बुधवार को पहली बार भव्य “जनजातीय उत्सव सह परिधान प्रतियोगिता” का आयोजन किया गया. विद्यालय परिसर में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में जनजातीय संस्कृति, परंपरा, भाषा, रहन-सहन, वेशभूषा, लोकाचार और सांस्कृतिक विरासत की अद्भुत झलक देखने को मिली. कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को अपनी समृद्ध जनजातीय संस्कृति से जोड़ना तथा जनजातीय परंपराओं एवं विरासत को सम्मान के साथ मंच प्रदान करना था.

कार्यक्रम के दौरान पूरा जे.पी. ऑडिटोरियम पारंपरिक सजावट से सजा हुआ नजर आया. मंच और सभागार में हरी पत्तियों, प्राकृतिक सामग्री और रंग-बिरंगे सजावटी फूलों से की गई सजावट ने पूरे वातावरण को आकर्षक और सांस्कृतिक रूप प्रदान किया. मंच पर लगाए गए जनजातीय उत्सव से संबंधित बैनर ने कार्यक्रम की थीम को और अधिक प्रभावशाली बनाया. विद्यार्थियों एवं शिक्षकों की सहभागिता से पूरा वातावरण उत्साह, उमंग और सांस्कृतिक रंगों से भर गया.

पारंपरिक परिधानों में नजर आए विद्यार्थी

जनजातीय उत्सव का सबसे प्रमुख आकर्षण पारंपरिक परिधान प्रतियोगिता रही. प्रतियोगिता में विद्यालय के विभिन्न वर्गों के छात्र-छात्राओं ने बड़ी संख्या में उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया. प्रतिभागियों ने अलग-अलग जनजातीय समुदायों की पारंपरिक वेशभूषा को आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया.

कई विद्यार्थियों ने अपने पारंपरिक परिधान के साथ आभूषण, सिर पर धारण किए जाने वाले पारंपरिक आभूषण, गमछा, प्राकृतिक सामग्री से बनी वस्तुएं, पारंपरिक उपकरण तथा सांस्कृतिक सामग्री भी मंच पर प्रदर्शित की. विशेष बात यह रही कि कुछ प्रतिभागियों ने अपनी संस्कृति में उपयोग की जाने वाली वस्तुओं को स्वयं तैयार कर कार्यक्रम में प्रस्तुत किया. इससे विद्यार्थियों की रचनात्मकता के साथ-साथ अपनी संस्कृति के प्रति उनके लगाव और समझ का भी परिचय मिला.

रैंप वॉक के माध्यम से प्रस्तुत की संस्कृति

परिधान प्रतियोगिता के दौरान विद्यार्थियों ने केवल पारंपरिक कपड़े पहनकर मंच पर उपस्थिति दर्ज नहीं कराई, बल्कि रैंप वॉक के माध्यम से अपनी संस्कृति और परंपरा को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया. प्रतिभागियों ने अपने पारंपरिक परिधान के बारे में जानकारी देते हुए उससे जुड़े सांस्कृतिक महत्व को भी दर्शाने का प्रयास किया.

कई प्रस्तुतियों में जनजातीय समाज के पर्व-त्योहार, पारंपरिक जीवनशैली और सांस्कृतिक पहचान की झलक दिखाई दी. विद्यार्थियों के आत्मविश्वास और मंच पर उनकी प्रस्तुति ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया. पारंपरिक परिधानों में सजे छात्र-छात्राओं ने पूरे मंच को जनजातीय संस्कृति के रंगों से भर दिया.

बालक वर्ग में मंगल सिंह सिंकू रहे प्रथम

कड़ी प्रतिस्पर्धा के बाद निर्णायक मंडल द्वारा बालक एवं बालिका वर्ग में विजेताओं का चयन किया गया.

बालक वर्ग में—

प्रथम स्थान सेकंड ईयर साइंस के मंगल सिंह सिंकू ने प्राप्त किया.
द्वितीय स्थान सेकंड ईयर आर्ट्स के प्रेम आशीष बन्धरा ने हासिल किया.
तृतीय स्थान सेकंड ईयर आर्ट्स के हीरामन सुंडी को मिला.

वहीं बालिका वर्ग में—

प्रथम स्थान फर्स्ट ईयर आर्ट्स की सोनाली देवगाम ने प्राप्त किया.
द्वितीय स्थान सेकंड ईयर आर्ट्स की मनीषा बोदरा रहीं.
तृतीय स्थान सेकंड ईयर आर्ट्स की प्रियंका गोप ने हासिल किया.

विजेताओं के चयन के दौरान प्रतिभागियों की पारंपरिक वेशभूषा, प्रस्तुति, आत्मविश्वास, सांस्कृतिक अभिव्यक्ति तथा मंच पर उनके प्रदर्शन को ध्यान में रखा गया.

जनजातीय संस्कृति को मुख्यधारा में सम्मान दिलाने का संदेश

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य केवल प्रतियोगिता आयोजित करना नहीं था, बल्कि जनजातीय संस्कृति, भाषा, ज्ञान और परंपराओं को सम्मान एवं प्राथमिकता देने का संदेश समाज तक पहुंचाना भी था. विद्यालय की ओर से इस आयोजन के माध्यम से विद्यार्थियों को यह समझाने का प्रयास किया गया कि आधुनिक शिक्षा और विकास के साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहना भी उतना ही महत्वपूर्ण है.

कार्यक्रम में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि जनजातीय समाज की समृद्ध परंपराओं, लोकज्ञान, प्रकृति के साथ उनके संबंध और पीढ़ियों से चली आ रही सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाना आवश्यक है. विद्यार्थियों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से यह संदेश दिया कि संस्कृति केवल पहनावे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भाषा, परंपरा, त्योहार, कला, जीवनशैली और सामुदायिक मूल्यों का समग्र रूप है.

प्रधानाचार्य डॉ. दीपेंद्र प्रसाद साह ने किया विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. दीपेंद्र प्रसाद साह ने जनजातीय संस्कृति के संरक्षण और जनजातीय समाज के उत्थान पर विशेष जोर दिया. उन्होंने विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ-साथ अपनी संस्कृति, भाषा और परंपराओं को जानने तथा उन्हें आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया.

उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज के भाषा, ज्ञान, विज्ञान, कला, परंपरा और सांस्कृतिक योगदान को सम्मान के साथ समझना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना आवश्यक है. विद्यार्थियों को विभिन्न सामाजिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए भी प्रेरित किया गया.

कार्यक्रम में दीपाली मैम ने भी मुख्य अतिथि के रूप में अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई और आयोजन की शोभा बढ़ाई. उन्होंने जनजातीय संस्कृति एवं परंपराओं के संरक्षण तथा विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी की सराहना की.

विद्यार्थियों और शिक्षकों की रही महत्वपूर्ण भागीदारी

इस आयोजन में विद्यालय के आर्ट्स, साइंस और कॉमर्स संकाय के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया. फर्स्ट ईयर और सेकंड ईयर के अनेक विद्यार्थियों ने अपनी पारंपरिक वेशभूषा एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

शिक्षकों ने भी विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करते हुए कार्यक्रम में सक्रिय सहभागिता की. मंच पर पारंपरिक वेशभूषा में विद्यार्थियों के साथ शिक्षकों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को और अधिक गरिमापूर्ण बना दिया.

निर्णायक मंडल ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका

परिधान प्रतियोगिता के विजेताओं के चयन में निर्णायक मंडल की महत्वपूर्ण भूमिका रही. प्रतियोगिता के निर्णायक के रूप में सावित्री पूर्ति मैम, मुक्ता सुंडी मैम, सविता मैम, कपिलकश झानागा मैम, पंकज हरणागा साह, किशोर साह, गीता मैम, अनिषा एवं रंजिता मैम ने अपनी जिम्मेदारी निभाई.

निर्णायकों ने प्रतिभागियों की प्रस्तुतियों का बारीकी से अवलोकन किया और उनके पारंपरिक परिधान, सांस्कृतिक प्रस्तुति तथा मंचीय आत्मविश्वास के आधार पर विजेताओं का चयन किया.

सफल संचालन और शानदार समापन

कार्यक्रम का संचालन बिरजो आयबरू साह एवं गीता बिरुआ मैम द्वारा किया गया. दोनों ने कार्यक्रम को क्रमबद्ध एवं प्रभावशाली ढंग से आगे बढ़ाया. मंच पर विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों और रैंप वॉक के दौरान दर्शकों ने उत्साहपूर्वक उनका मनोबल बढ़ाया.कार्यक्रम के दौरान मंच पर पारंपरिक वेशभूषा में सजे विद्यार्थियों का सामूहिक प्रदर्शन विशेष आकर्षण का केंद्र रहा. विद्यार्थियों ने पारंपरिक नृत्य एवं सांस्कृतिक भाव-भंगिमाओं के माध्यम से भी अपनी विरासत की झलक प्रस्तुत की. पूरे कार्यक्रम में एकता में विविधता और अपनी जड़ों से जुड़े रहने का संदेश स्पष्ट रूप से दिखाई दिया.

पहली बार आयोजित हुआ विशेष जनजातीय उत्सव

डी.पी.एस. इंटर कॉलेज चाईबासा के परिसर में पहली बार आयोजित इस जनजातीय उत्सव ने विद्यालय के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में एक नई पहल के रूप में अपनी पहचान बनाई. कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को अपनी संस्कृति को समझने, उसे मंच पर प्रस्तुत करने और दूसरों के साथ साझा करने का अवसर दिया. कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश भी सामने आया कि जनजातीय संस्कृति केवल अतीत की विरासत नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य की भी महत्वपूर्ण पहचान है. इसे संरक्षित करना, सम्मान देना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है.अंत में सभी प्रतिभागियों, शिक्षकों, निर्णायक मंडल और आयोजन से जुड़े सदस्यों के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया गया. विद्यार्थियों के उत्साह, शिक्षकों की सहभागिता और विद्यालय प्रबंधन के मार्गदर्शन से जनजातीय उत्सव एवं परिधान प्रतियोगिता सफलतापूर्वक संपन्न हुई.

डी.पी.एस. इंटर कॉलेज चाईबासा का यह आयोजन जनजातीय संस्कृति के सम्मान, संरक्षण और संवर्धन की दिशा में एक सराहनीय पहल के रूप में याद किया जाएगा.

यह भी पढ़ें: ईद-ए-मिलाद-उन-नबी पर चंदवा में सौहार्द की मिसाल, थाना प्रभारी और CO को अंगवस्त्र भेंट कर किया सम्मानित

संबंधित सामग्री

JSSC CGL भर्ती परिक्षा फर्जीवाड़ा: किंगपिन अभय तिवारी की पत्नी और भाई को कोर्ट का झटका, जमानत याचिका खारिज 

JSSC CGL भर्ती परिक्षा फर्जीवाड़ा: किंगपिन अभय तिवारी की पत्नी और भाई को कोर्ट का झटका, जमानत याचिका खारिज 

JSSC CGL भर्ती परिक्षा फर्जीवाड़ा मामले के किंगपिन अभय तिवारी की पत्नी और भाई को कोर्ट का झटका मिला है.

SBI गबन मामले में आरोपी सुनील कुमार साह को हाईकोर्ट से झटका, अग्रिम जमानत याचिका खारिज 

SBI गबन मामले में आरोपी सुनील कुमार साह को हाईकोर्ट से झटका, अग्रिम जमानत याचिका खारिज 

SBI गबन मामले में आरोपी सुनील कुमार साह को हाईकोर्ट से झटका लगा है. झारखंड हाईकोर्ट ने उन्हें अग्रिम जमानत देने से इनकार किया.

करोड़ों की बेनामी संपत्ति के आरोपी रिटायर्ड अमीन साधु शरण पाठक को हाईकोर्ट से राहत, मिली अग्रिम जमानत 

करोड़ों की बेनामी संपत्ति के आरोपी रिटायर्ड अमीन साधु शरण पाठक को हाईकोर्ट से राहत, मिली अग्रिम जमानत 

करोड़ों की बेनामी संपत्ति के आरोपी रिटायर्ड अमीन साधु शरण पाठक को हाईकोर्ट से राहत मिली है. आय से अधिक संपत्ति मामले में उन्हें झारखंड हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत मिली है. 

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जन्मदिन की दी बधाई, मरांग बुरु से की उत्तम स्वास्थ्य की कमाना

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जन्मदिन की दी बधाई, मरांग बुरु से की उत्तम स्वास्थ्य की कमाना

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जन्मदिन की बधाई और शुभकामनाएं दी हैं.

झारखंड में 2022 से राज्य मानवाधिकार आयोग के चेयरपर्सन का पद खाली, हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी 

झारखंड में 2022 से राज्य मानवाधिकार आयोग के चेयरपर्सन का पद खाली, हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी 

झारखंड में 2022 से राज्य मानवाधिकार आयोग के चेयरपर्सन का पद खाली है. अध्यक्ष और अन्य पदों के खाली रहने पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई है.