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रांची/डेस्क: झारखंड में आतंक का दूसरा नाम बन चुके तृतीय प्रस्तुति कमेटी (TPC) के कुख्यात कमांडर ब्रजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह का अंत हो गया. उत्तर प्रदेश एटीएस (UP ATS) ने वाराणसी में आज रविवार तड़के हुई एक मुठभेड़ में उसे मार गिराया है. इस खूंखार नक्सली पर झारखंड सरकार की ओर से 25 लाख और एनआईए (NIA) की ओर से 5 लाख यानी कुल 30 लाख रुपये का इनाम घोषित था.
इधर शीर्ष नक्सली असीम मंडल दस्ता के बचे हुए दो नक्सली 5 लाख के इनामी समीर महतो और उसकी पत्नी 2 लाख की इनामी मालती मुर्मू को भी बंगाल पुलिस ने पकड़ लिया है. नक्सलियों के खिलाफ लगातार हो रही कार्रवाई के बाद अब झारखंड नक्सलमुक्त के करीब पहुंच गया है.
इस वर्ष नक्सलियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई
सुरक्षा बलों ने नक्सलियों के खिलाफ इस वर्ष बड़े पैमाने पर सफलता हासिल की है. असीम मंडल, अनमोल उर्फ सुशांत, अमित मुंडा, सहदेव महतो , रंजीत गंझू, इजराइजल पूर्ति जैसे इनामी बड़े चेहरों के साथ 120 से ज्यादा भाकपा माओवादी, PLFI, TSPC और JJMP के कैडर अरेस्ट किये जा चुके हैं. वहीं राज्य में 50 से ज्यादा नक्सलियों ने हथियार डाले हैं. अब तक 111 हथियार, 9,904 कारतूस और नकदी जब्त किये गए हैं.
मुख्यधारा में लौट रहे नक्सली
पुलिस और केंद्रीय बलों (सीआरपीएफ, कोबरा, झारखंड जगुआर) द्वारा चलाए जा रहे अभियानों के बढ़ते दबाव और आत्मसमर्पण नीति के सकारात्मक परिणामों ने नक्सलियों को मुख्यधारा में लौटने पर मजबूर किया है. साथ ही जिला पुलिस ने आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों के पुनर्वास की दिशा में बेहतर काम किया. नक्सलियों का करीब 26 सालों तक जंगलों में खौफ रहा. जबकि आज सारंडा में भयमुक्त माहौल है.
वर्ष 2025 के बाद बदली रणनीति के तहत सुरक्षा बलों ने नक्सली क्षेत्रों में पिकेट स्थापित किए और तकनीकी इंटेलिजेंस का प्रयोग किया. आज कई बड़े इलाके नक्सलमुक्त हैं.
झारखंड पुलिस की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के 10 प्रमुख नक्सल प्रभावित क्षेत्र अब पूरी तरह से माओवाद से मुक्त कराए जा चुके हैं. इनमें शामिल हैं:-
- माओवादियों का गढ़ माने जाने वाला छत्तीसगढ़-गढ़वा-लातेहार के सीमावर्ती बूढ़ा पहाड़ का क्षेत्र.
- कोल्हान का सारंडा, टोंटो, गोईलककेरा, पोड़ाहाट क्षेत्र.
- चतरा व पलामू का कोलेश्वरी क्षेत्र.
- गिरिडीह का पारसनाथ क्षेत्र.
- बोकारो का लुगु पहाड़ एवं झुमरा पहाड़ क्षेत्र.
- गुमला का चैनपुर व बिशुनपुर आदि पहाड़ी क्षेत्र.
- लातेहार का सरयू, गारू, महुआडांड़ आदि का जंगली क्षेत्र.
- लोहरदगा का पश्चिमी पहाड़ी क्षेत्र.
- खूंटी का पश्चिमी/दक्षिणी वन क्षेत्र.
- सरायकेला के कुचाई का जंगली क्षेत्र.
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