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रांची/डेस्क: झारखंड हाईकोर्ट ने साल 2002 में हुए एक भीषण सड़क हादसे के मामले में अपना महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. अदालत ने लापरवाही और तेज रफ्तार से गाड़ी चलाकर 6 लोगों की जान लेने वाले टैंकर ड्राइवर अनिल सिंह उर्फ अनिल कुमार सिंह की दोषसिद्धि और सजा को बरकरार रखा है. न्यायाधीश प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की कोर्ट ने आरोपी की क्रिमिनल रिवीजन याचिका को खारिज कर दिया है.
क्या था पूरा मामला?
घटना 5 नवंबर 2002 की दोपहर करीब 1:30 बजे की है. जमशेदपुर के पोटका थाना क्षेत्र में एक मारुति वैन (नंबर WE-02C-2692) को सामने से आ रहे एक टैंकर (नंबर BR-2H-4057) ने जोरदार टक्कर मार दी थी. टैंकर को बेहद लापरवाही और तेज रफ्तार से चलाया जा रहा था.
इस भीषण टक्कर में मारुति वैन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी. हादसे में रामेश्वर मुखी, वैन चालक तुकलू मुखी, रीना मुखी और मनीषा सांडिल सहित कुल 6 लोगों की मौत हो गई थी. इसके अलावा बलवती देवी, चिंकीरी देवी, सुधीर मुखी, संजय मुखी, लक्ष्मी सांडिल और रेशमा सांडिल गंभीर रूप से घायल हो गए थे. घटना के संबंध में प्रत्यक्षदर्शी राम मुखी के बयान पर पोटका थाने में केस दर्ज किया गया था.
निचली अदालतों का क्या था फैसला?
जमशेदपुर की निचली अदालत ने 19 अक्टूबर 2012 को अनिल सिंह को दोषी करार दिया था. अदालत ने उसे आईपीसी की धारा 304-A (लापरवाही से मौत) के तहत 2 साल की सश्रम कारावास और 5,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी. धारा 279 (रैश ड्राइविंग) के तहत 6 महीने की सजा और 1,000 रुपये जुर्माना. धारा 337 (जान जोखिम में डालना) के तहत 6 महीने की सजा सुनाई थी.
सभी सजाएं साथ-साथ चलनी थीं. इसके बाद 6 फरवरी 2017 को जमशेदपुर के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश-IV ने भी इस सजा को सही ठहराते हुए ड्राइवर की अपील खारिज कर दी थी, जिसके बाद आरोपी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.
हाईकोर्ट ने क्यों बरकरार रखी सजा?
सुनवाई के दौरान आरोपी के वकील ने दलील दी कि ड्राइवर का नाम एफआईआर में नहीं था, उसकी पहचान नहीं कराई गई और यह दुर्घटना मारुति वैन ड्राइवर की गलती से हुई थी.
हालांकि, हाईकोर्ट ने इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि मामले के गवाह, जो दुर्घटना के समय वैन के ठीक पीछे थे, और हादसे में घायल हुए अन्य गवाहों ने स्पष्ट रूप से अदालत को बताया कि यह हादसा टैंकर ड्राइवर की लापरवाही और तेज रफ्तार के कारण ही हुआ था.
हाईकोर्ट ने पाया कि दोनों निचली अदालतों ने सबूतों का सही मूल्यांकन किया है और फैसले में किसी भी प्रकार की कानूनी गलती नहीं है.
2 महीने में सरेंडर करने का आदेश
हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए आरोपी अनिल सिंह की जमानत रद्द कर दी है. अदालत ने दोषी ड्राइवर को आदेश दिया है कि वह इस फैसले की तारीख से दो महीने के भीतर संबंधित ट्रायल कोर्ट में आत्मसमर्पण (Surrender) करे और अपनी बची हुई सजा काटे. अगर वह ऐसा नहीं करता है, तो ट्रायल कोर्ट को उसके खिलाफ सख्त दंडात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं.
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